::राम सिंह मेहता की लेखनी से
लोहाघाट। उत्तराखंड राज्य के चम्पावत जिले में जिला मुख्यालय के बस स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है एक हथिया नौला बेजोड़ कला के नमूने के साथ प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रुप में भी उभर गया है।
पत्थर को तराश कर बनाया गए एक हथिया नौले की कलाकृति पौराणिक कथा के कारण प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि इन सारी आकृतियों को एक हाथ वाले शिल्पकार ने एक रात में तराशकर बनाया था। यह पत्थर पर किया जाने वाला शानदार कार्य था जो कि चंद राजाओं के शासन काल में बनाया गया था। यह विशिष्ट नक्काशीदार पत्थर के ढांचे से निर्मित एक हाथ के कलात्मक कलाकार जगन्नाथ मिस्त्री ने अपनी बेटी कस्तुरी की मदद से बनाया था। एक हाथ से निर्मित होने के कारण इसका नाम एक हथियानौला पड़ा। लोक मान्यता है कि चंद राजाओं का राजमहल व कुमाऊं की स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध बालेश्वर मंदिर का निर्माण करने वाले मिस्त्री जगन्नाथ का एक हाथ चंद शासकों ने कटवा दिया था। ताकि बालेश्वर मंदिर जैसा निर्माण दुबारा न हो सके लेकिन जगन्नाथ मिस्त्री ने अपनी कला को जिन्दा रखने के लिए अपनी पुत्री की सहायता से ढकना गांव से दो किलोमीटर की दूरी पर पानी के श्रोत को नौले का अति आकर्षक रूप दे दिया। नौले पर लगे पत्थरों में लोकजीवन के विभिन्न दृष्यों, नर्तक, वादक, गायक कामकाजी महिलाओं आदि का सजीव चित्रण प्रभावशाली तरीके से किया गया है। यह कला की दृष्टि से बेजोड़ कलाकृतियों में से एक है। एक हथिया नौला वर्तमान समय में भी स्थापत्य कला प्रेमियों लिए आकर्षण का केंद्र बना है। सरकार को चाहिए कि इस प्रकार की ऐतिहासिक धरोधरों का संरक्षण कर इसे पर्यटन के क्षेत्र में उभारें।






















Leave a comment