रिपोर्टर: निमिष राय
लोहाघाट। नगर लोहाघाट में 124 वें वर्ष में प्रवेश कर रही रामलीला के पांचवे दशरथ मरण के बाद भरत का वन में राम से मिलने तक लीला का मंचन किया गया।
श्रीराम सेवा सांस्कृतिक रामलीला कमेटी अध्यक्ष जीवन मेहता की अध्यक्षता में राम-लक्षमण और सीता का वन को जाना, इधर अयोध्या में राम के वियोग में दशरथ की मृत्यु होना। भरत-शत्रुघ्न को पिता की मौत का समाचार मिलने पर अपने ननिहाल से लौटना। भरत का कैकेयी और शत्रुघ्न का मंथरा के साथ संवाद के बाद भरत का राम से मिलने वन को जाना। लीला में भरत के पात्र जतिन पुनेठा, शत्रुघ्न के पात्र कार्तिक धामी, राम के पात्र नवनीत पांडेय, लक्षमण के पात्र हृदयांश पांडेय, सीता की पात्र प्रज्ञा मेहता, केवट के पात्र कमल ओझा, दशरथ के पात्र जगदीश जोशी, कैकेयी के पात्र जितेंद्र पुनेठा और वशिष्ठ के पात्र जीवन कलौनी, मंथरा के पात्र विकास फर्त्याल, सुमित्रा की पात्र रवीना अधिकारी और सुमंत के पात्र सागर वर्मा के अभिनय की सराहना की। संचालन नरेश राय ने किया। इस मौके पर संरक्षक प्रहलाद सिंह मेहता, महासचिव मुकेश साह, विपिन वर्मा, जीवन गहतोड़ी, डीडी पांडेय, प्रकाश पुनेठा, आनंद पुजारी, कैलाश बगौली, अजय कलखुड़िया, ईश्वरी लाल साह, गोविंद वर्मा, कीर्ति बगौली, पारस जुकरिया, संजय फर्त्याल, अमित साह, भूपाल सिंह मेहता, राजू गड़कोटी, विनोद गोरखा, दिनेश सुतेड़ी, दीपक सुतेड़ी,अजय ढेक, क्षितिज जुकरिया, रोहन राजपूत, कमलेश जोशी, किरन पुनेठा, रेखा पुजारी, पूजा कलखुड़िया, कमला पुनेठा, सरोज पुनेठा भावना कलौनी आदि मौजूद रहीं।






















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